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Maru Mahotsav Jaisalmer - रेत के धोरों पर ‘मरू महोत्सव’

Maru Mahotsav Jaisalmer - रेत के धोरों पर ‘मरू महोत्सव’


Maru Mahotsav Jaisalmer - रेत के धोरों पर मरू महोत्सव यानी डेजर्ट फेस्टिवल के बारे में आज बात करते हैं वैसे तो जैसलमेर हमेशा से पर्यटन का प्रमुख केंद्र रहा है या देश विदेश से सैलानी हर मौसम में घूमने आते रहते हैं लेकिन जैसलमेर का मरू महोत्सव विदेशो तक अपनी ख्याति पा चुका है इस कारण विश्व के अनेक देशों से सैलानी खास करके जैसलमेर का मरू महोत्सव देखने के लिए आते हैं

 

जैसलमेर की गलियों सड़कों और चौराहों पर सैलानियों का सैलाब मरुभूमि पर मस्ती का आलम रेत के टीलों पर थिरकते पांव रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम रोमांचक प्रतिस्पर्धा और आकर्षक हस्तशिल्प प्रदर्शनिया ! इन सब को मिलाकर नाम दिया है मरू मेला, मरू महोत्सव यानी डेजर्ट फेस्टिवल !

Maru Mahotsav का शुभारंभ

राजस्थान के रेगिस्तान में स्थित जैसलमेर शहर की धरती पर ऋतुराज बसंत का आगमन अपने साथ मरू महोत्सव के रूप में मौज मस्ती और मनोरंजन की सौगात लेकर आता है! बसंत पंचमी के बाद आने वाली माघ पूर्णिमा के दिन से मरू महोत्सव का आयोजन की शुरुआत होती है! और पूरा जन जीवन मोज मस्ती के रंग में डूब जाता है!

 

पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए हर वर्ष मरु महोत्सव का आयोजराज्य के पर्यटन विभाग द्वारा किया जाता है! मरु महोत्सव अपनी अनोखी विशेषताओं के लिए न केवल भारत बल्कि विदेशों मे अपनी पहचान कायम कर चुका है! और यही वजह है कि इन अवसर पर पूरी दुनिया के विभिन्न देशों से आने वाले विदेशी पर्यटकों की भी भरमार रहती है !

Maru Mahotsav Jaisalmer सोनार दुर्ग से शोभा यात्रा

महोत्सव के दौरान तीन दिन तक विभिन्न मनोरंजन कार्यक्रम आयोजित होते हैं! शुभारंभ दिवस पर ऐतिहासिक सोनार दुर्ग से शोभा यात्रा निकाली जाती है जो शहर के मुख्य मार्गों से गुजरती हुई शहीद पूनम सिंह स्टेडियम पहुंचती है

इस शोभायात्रा में जनप्रतिनिधि, अधिकारी, देसी - विदेशी पर्यटकों के साथ साथ शहर के गणमान्य लोग भी मौजूद रहते हैं इस शोभायात्रा के रास्ते भर में लोक कलाकार नृत्य प्रदर्शन और अपनी सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देते हैं जिस कारण पूरा माहौल ही रंगीन बन जाता है! बीएसएफ के सुसज्जित ऊट सवारों और बैंडवादको का जत्था लोगों के आकर्षण का केंद्र बना रहता है! रास्ते भर शहरवासियों द्वारा पुष्प वर्षा के साथ शोभायात्रा का स्वागत किया जाता है! स्टेडियम मे मरू महोत्सव के शुभारंभ की घोषणा होती है! वहा पर दर्शकों के हुजूम सा होता है

Maru Mahotsav Jaisalmer मे प्रतियोगिताएं

रंग बिरंगे चटकीले परिधानों में सजे सांवरे लोक कलाकार एक के बाद एक रंगारंग कार्यक्रम प्रस्तुत करते है! मिस्टर डेजर्ट यानी मरुश्री और मिस मुमल प्रतियोगिता के साथ – साथ साफा बांधने प्रतियोगिता, मूछ श्री प्रतियोगिता और राजस्थानी परिधान जैसे अनेक प्रतियोगिताएं आयोजित होती है! इनमे श्रेष्ठ स्थान प्राप्त करने वाले प्रतिभाओं को पुरस्कृत और सम्मानित किया जाता है! संध्या से शुरू हुआ सांस्कृतिक कार्यक्रम देर रात तक चलता रहता है

 

दूसरे दिन सवेरे गड़ीसर झील पर सूर्योदय का दृश्य निहारने के लिए भोर होते ही लगने लगता है प्रकृति प्रेमियों का मेला ! ठंडी बहार, झील का शांत शीतल जल और उसमें झाकती सूरज की परछाई और कलात्मक छतरियों का प्रतिबिंब यह नजारा देखकर नजर खुद-ब-खुद ठहर जाती है!

Maru_Mahotsav_Jaisalmer_डेजर्ट_फेस्टिवल


राजस्थानी गीत, संगीत और सांस्कृतिक in Maru Mahotsav

दिन में ऊट श्रृंगार, ऊंट दौड़, केमल पोलो और लददु ऊट जैसी मनोरंजक और रोमांचक प्रतियोगिताएं होती है! देसी विदेशी सैलानियों के बीच होने वाली रस्साकशी प्रतियोगिता तो दर्शकों का भरपूर मनोरंजन करती है! शाम के समय फिर शुरू होता है लोक गीत, लोक संगीत और कलात्मक नृत्यमयी सांस्कृतिक कार्यक्रमों का सिलसिला!

एक के बाद एक प्रस्तुतियों में राजस्थानी गीत, संगीत और नृत्य देखकर दर्शक हर्ष विभोर हो जाते हैं!

सम में समापन समारोह Maru Mahotsav

मरू महोत्सव का समापन समारोह जैसलमेर शहर से करीब 40 KM दूर स के स्वर्णिम धोरों के बीच मनाया जाता है ! सवेरे से शाम तक रेट के रंगमंच पर लोक नृर्तकों के नृत्य आयोजन! वातावरण में गूंजता लोक संगीत चटकीले भड़कीले परिधानों में सजी समरी महिलाएं और बन ठन कर मेले का मजा लेने आए हर वर्ग और हर तरह के सैलानी जिसमे क्या बच्चे क्या व्रद्ध और क्या जवान सब के सब फूल मस्ती मे enjoy करते है !

रेतीले धोरों पर सूर्यास्त का नजारा तो देखते ही बनता है! चाँद सितारे सूरज ढलने के साथ ही नीले आसमान में निकल आते हैं ! माघ पूर्णिमा का पूर्ण चंद्रमा सम के रेतीले धोरों पर चाँद सी चांदनी बिखेरता है! रेत के टीलों पर उभर आती है ऊंटो की कतारे और उन पर बैठे ऊंट सवार !

 इन्हीं के बीच मनाए जाने वाले समापन समारोह मे रेगिस्तान की मुमल - महिंद्र ढोला-मारू आदि प्रेम कथाओं पर आधारित नृत्य नाटिका का मंचन किया जाता है और अंत में होती है रंगारंग आतिशबाजी !

आकाश में पूर्णिमा का चमकता चांद, धरती पर छिटकती चांदनी, रेत के समंदर में रेगिस्तानी जहाज ऊंटो की कतारें, जलती हुई मशाले, हवा में बिखरती आतिशबाजी की चिंगारियां और लोक कलाकारों द्वारा प्रस्तुत आकर्षक कार्यक्रम ! ये यह सब मिलकर वो नजारा पेश करते हैं कि बस पूछो मत!

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Maru Mahotsav मे देखने लायक

मरू महोत्सव में आयोजित होने वाले विशेष कार्यक्रमों के अलावा जैसलमेर के ऐतिहासिक दुर्ग, कलात्मक हवेलियों, हस्तशिल्प प्रदर्शनियों तथा सड़कों और बाजारों में भी पर्यटको की चहल पहल बढ़ जाती है! बस यूं समझ लीजिए कि पूरे तीन दिन तक इस शहर में नई रौनक सी छा जाती है

राजस्थान के रेगिस्तान में स्थित जैसलमेर शहर जोधपुर से  280 किलोमीटर दूर है! किसी भी शहर से आसानी से सड़क मार्ग द्वारा पहुंचा जा सकता है! जैसलमेर में रेलवे स्टेशन एयरपोर्ट दोनों है!

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