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ग्राम पंचायत, वार्ड सभा, ग्राम सभा के दायित्व कृत्य व शक्तियां,panchayati raj

 

ग्राम पंचायत, वार्ड सभा, ग्राम सभा के दायित्व कृत्य व शक्तियां,panchayati raj

ग्राम पंचायत की स्थापना

संविधान के 73 वां संविधान संशोधन के फलस्वरूप 24 अप्रैल 1983 को पंचायती राज संस्थाओं की त्रिस्तरीय व्यवस्था को देश की शासन व्यवस्था के तीसरे स्तर के रूप में लागू किया गया! ग्रामीण विकास में सक्रिय जनभागीदारी व स्थानीय समस्याओं के समुदाय द्वारा स्थानीय स्तर पर ही समाधान के उद्देश्य से ग्राम पंचायत को स्थानीय स्वशासी संस्था के रूप में संवैधानिक दर्जा दिया गया था!

वर्तमान पंचायती राज व्यवस्था – एक परिचय

संविधान की धाराओं के अनुसरण में, राज्य की विधायिका द्वारा कानूनन, पंचायतों को ऐसी शक्तियां वह अधिकार सुपुर्द किए जा सकेंगे, जो कि उन्हें स्व-शासी संस्थाओं के रूप में कार्य करने में सक्षम बनावे !

पंचायती राज संस्थाओं की मुख्य भूमिका निम्न दो पहलुओ से जुड़ी है

1 आर्थिक विकास एवं सामाजिक न्याय की योजना तैयार करना (प्लान बनाना)

2 आर्थिक विकास एवं सामाजिक न्याय संबंधी ऐसी योजनाओं का क्रियान्वयन करना जो कि उन्हें सौंपी गई हो वह जिनमें 11वीं अनुसूची में शामिल 29 विषय भी शामिल किए जा सकेंगे !

पंचायती राज की अवधारणा

पंचायती राज व्यवस्था सामूहिक निर्णय की अवधारणा पर आधारित है ! ऐतिहासिक रूप से भारतीय ग्रामीण समाज में पंचायतों के प्रति ग्रामीण समुदाय की गहरी आस्था है ! पंचों की सामूहिक राय से गांव के विकास हेतु निष्पक्ष निर्णय लिए जाने की परम्परा रही है ! अनादि काल से गांव के छोटे-मोटे विवादों का न्याय पूर्ण निपटारा भी पंचायतों द्वारा ही होता आया है ! इसलिए पंचों को पंच परमेश्वर के रूप में सम्मान से देखा जाता है !

पंचायत की व्यवस्था का प्रभावी रूप से संचालन पंचायतों के चुने हुए पंचों का ही सामूहिक उत्तरदायित्व है ! पंचों की जनहित में दी गई राय से ही पंचायत सुचारू रूप से अपने दायित्व पूरी कर सकती है ! कानून में ‘पंचायती राज’ है ‘सरपंच राज, प्रधान राज एवं प्रमुख राज’ नहीं ! इसलिए सरपंच, प्रधान, जिला प्रमुख-पंचायती राज संस्थाओं की त्रिस्तरीय व्यवस्था में अध्यक्ष होने के नाते, अपनी संस्था के सामूहिक निर्णय के अनुसार कार्यवाही कर सकते हैं !

पंचायती राज की सशक्त व्यवस्था हेतु जनता द्वारा चुने गए सभी जनप्रतिनिधि यह तो पंच-सरपंच, पंचायत समिति सदस्य एवम प्रधान, जिला परिषद सदस्य एवं जिला प्रमुख-सामूहिक एवं व्यक्तिगत रूप से जनहित में सक्रिय भूमिका निभाते तभी इस व्यवस्था की जड़े मजबूत होगी!

ग्राम पंचायत की संरचना

प्रत्येक पंचायत में एक सरपंच होगा ! वह उस ग्राम पंचायत के मुख्या के रूप में जाना जाएगा !

और जितने वार्ड होंगे उसमे प्रत्येक निर्वाचित पंच होंगे !

ग्राम पंचायत का कार्यकाल और निर्वाचन

प्रत्येक पंचायती राज संस्था, यदि इस अधिनियम के अधीन पहले विघटित नहीं कर दी जाए तो संबंधित ग्राम पंचायत की प्रथम बैठक की तारीख से 5 वर्ष तक बनी रहेगी !

ग्राम पंचायत के उप सरपंच के निर्वाचन के लिए की गई बैठक संबंधित ग्राम पंचायत की पहली बैठक समझी जाएगी !

ग्राम पंचायत के निर्वाचन की संपूर्ण जिम्मेदारी राज्य निर्वाचन आयोग की होगी !

यह ग्राम पंचायत के कार्यकाल समाप्ति के पूर्ण और विघटन की स्थिति में छह माह की कलावधि की समाप्ति के पूर्ण पूरा किया जाएगा !

सरपंच और उसका निर्वाचन

प्रत्येक ग्राम पंचायत में एक सरपंच होगा ! वह संपूर्ण पंचायत सर्किल के समस्त मतदाताओं द्वारा प्रत्यक्ष मतदान से निर्वाचित किया जाता है !

उप सरपंच का निर्वाचन

प्रत्येक पंचायत में एक उपसरपंच होगा ! जिसका चुनाव जनता द्वारा चुने गए वार्ड पंचों में से एक को बहुमत के आधार पर सुना जाता है !

वार्ड पंच ग्राम पंचायत सदस्य

ग्राम पंचायत सदस्य के रूप में वार्ड पंच सबसे छोटे निर्वाचन क्षेत्र यानी वार्ड से चुने गए जनप्रतिनिधि है !

सरपंच ग्राम पंचायत का अध्यक्ष एवं वार्ड पंच पंचायत के सदस्य होते हैं ! जो जनता द्वारा सीधे सुने जाते हैं! गांव स्तर पर विकास योजना बनाने में जनता की भागीदारी जुटाने के लिए राजस्थान पंचायती राज अधिनियम में वार्ड सभा का प्रावधान किया गया है

सरपंच व उप सरपंच के त्यागपत्र

सरपंच उपसरपंच या पंच विकास अधिकारी को संबंधित स्वहस्ताक्षरित लेख द्वारा अपने पद से त्यागपत्र दे सकेंगे

वार्ड सभा क्या है

प्रत्येक वार्ड में एक वार्ड सभा होगी तथा वार्ड के सभी बालिग निवासी इसके सदस्य होंगे !

वार्ड सभा की प्रतिवर्ष कम से कम 2 बैठके होगी यानी प्रत्येक वित्तीय वर्ष (अप्रैल से मार्च) की हर छमाही में एक बैठक !

छमाही बैठकों के अलावा यदि वार्ड सभा के 10 % से अधिक सदस्य वार्ड सभा बुलाने की लिखित मांग करें तो 15 दिन के भीतर ऐसी बैठक बुलाई जावेगी !

कोरम (गणपूर्ति)

वार्ड सभा की बैठक में कोरम पूरा होना जरूरी है तभी बैठक मान्य होगी ! कोरम पूरा होने के लिए 10 % सदस्यों की उपस्थिति जरूरी है ! साथ ही अनुसूचित जाति, जनजाति, पिछड़ा वर्ग एवं महिलाओं की उपस्थिति भी वार्ड में उनकी आबादी के अनुपात में जरूरी है !

वार्ड सभा का कोरम पूरा नहीं होने पर बैठक स्थगित की जावे ! बैठक दुबारा बुलाए जाने पर भी कोरम पूरा होना जरूरी है !

बैठक की अध्यक्षता

वार्ड सभा की बैठक की अध्यक्षता – वार्ड पंच द्वारा की जाएगी ! पंच की अनुपस्थिति में वार्ड सभा में मौजूद सदस्यों द्वारा बहुमत से चयनित प्रतिनिधि द्वारा अध्यक्षता की जाएगी !

वार्ड सभा के मुख्य कार्य

सभा की सभी बैठकों में ऐसे विषयों पर, जो विभिन्न पंचायती राज संस्थाओं, राज्य सरकार या सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी हो, पर चर्चा की जा सकेगी !

वार्ड सभा बैठक के एजेंडा में शामिल सभी विषयों पर चर्चा करने के लिए स्वतंत्र होगी ! और पंचायत वार्ड सभा द्वारा किए गए सुझाव पर विचार करेगी !

संबंधित पंचायत समिति के विकास अधिकारी या उसके द्वारा नामित व्यक्ति वार्ड सभा की बैठक में भाग लेकर, बैठक का कार्यवाही विवरण लिखने, वार्ड सभा के उपस्थित सदस्यों को पढ़कर सुनाने एवं उसकी सहमति के बाद हस्ताक्षर कराने के लिए जिम्मेवार होगा ! इस प्रकार तैयार बैठक कार्यवाही विवरण की लिखित प्रति व सक्षम प्राधिकारी को प्रस्तुत करेगा !

वार्ड पंच के मुख्य कर्तव्य एवं कृत्य

राजस्थान पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धारा-7 में वर्णित वार्ड सभा के सभी कृत्य संपन्न कराना, वार्ड सभा का अध्यक्ष होने के नाते वार्ड पंच का प्रमुख दायित्व है !

वार्ड सभा अध्यक्ष के नाते दायित्व

  1. वार्ड सभा जनता के प्रति जवाबदेही का सीधा मंच है ! अतः हर वार्ड पंच का यह दायित्व है ! कि वह सुनिश्चित करें कि अपने वार्ड की वार्ड सभा में, वार्ड क्षेत्र में संपन्न समस्त विकास कार्यों का ब्यौरा रखें, निर्माण कार्यों पर हुए खर्च का ब्यौरा रखें तथा जनता की राय से आगामी वर्ष में वंचित विकास कार्यों की प्राथमिकता तय करावे !
  2. वार्ड में संपन्न होने वाले कार्यों की प्रगति की समीक्षा करते समय ध्यान रखें ! कि निर्माण कार्यों की गुणवत्ता कैसी रही, कितना पैसा आया कितना खर्च हुआ ! और कितना भुगतान हो चुका है अथवा शेष है!
  3. वार्षिक/पंचवर्षीय/योजना-विशेष की विकास योजना बनाने के लिए सूचनाएं जुटाने में पंचायत का सहयोग करें !
  4. हर वार्ड सभा के स्थाई एजेंडा के रूप में यह भी निगरानी रखें कि आपके वार्ड में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, एएनएम, स्कूल टीचर, कृषि पर्यवेक्षक, पटवारी, हैंड पंप मिस्त्री, राशन डीलर आदि विकास कर्मी नियमित और वांछित सेवाएं दे रहे हैं या नहीं !

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  1. वार्ड सभा क्षेत्र में चलाई जाने वाली विकास योजनाओं के प्रस्ताव तैयार करावे ! और उनकी प्राथमिकता गांव वालों की जरूरत और उपलब्ध धनराशि के क्रम में, तय करावे !
  2. वार्ड सभा क्षेत्र में विभिन्न विकास योजनाओं के पात्र व्यक्तियों को जरूरत आधारित प्राथमिकता के क्रम में चिन्हित करावे !
  3. विकास योजनाओं को सही रूप से लागू करने में सहयोग करें !
  4. जन उपयोगी सुविधाओं जैसे रास्तों पर रोशनी, पेयजल हेतु सार्वजनिक नल, हैंडपंप, सार्वजनिक कुएं, सफाई व्यवस्था, सिंचाई सुविधाओं के लिए सही स्थान की पहचान कर पंचायत को सुझाव दें !

ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग,  राजस्थान सरकार (ग्रामीण विकास)

  1. जनहित के मुद्दे जैसे-स्वच्छता, पर्यावरण सुरक्षा, प्रदूषण निवारण एवं सामाजिक बुराइयों जैसे-बाल विवाह, दहेज प्रथा, नुक्ता प्रथा, भ्रूण हत्या एवं बालिका वध, महिलाओं पर हिंसा, लड़के और लड़की में भेद-भाव आदि को रोकने संबंधी योजनाएं बनावे और जन जागरूकता बढ़ावे ! वार्ड सभा के माध्यम से जन चेतना के सतत प्रयास जारी रखें !
  2. वार्ड के विभिन्न वर्गों में एकता और भाईचारा बढ़ाने में प्रयास करें !
  3. सरकार से विभिन्न सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के अंतर्गत देय लाभ- पेंशन / सहायता / छात्रवृत्ति आदि प्राप्त करने वाले व्यक्तियों की पात्रता को सत्यापित कराने में सक्रिय सहयोग करें !
  4. वार्ड सभा क्षेत्र में संपन्न सभी विकास कार्यों का सामाजिक अंकेशन करा कर ही, ऐसे कार्यों के पूर्णता प्रमाण पत्र प्रदान करें !
  5. विभिन्न विकास कर्मियों से उनके द्वारा, उस वार्ड सभा क्षेत्र में दी जा रही सेवाओं और कार्यों की सूचना जुटाकर पंचायत बैठकों में दें !

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  1. वार्ड के स्कूल में, शिक्षा के अधिकार 2009 कानून की पालना में विद्यालय प्रबंधन समिति, माता-पिता और अध्यापकों की बैठकें नियमित रूप से आयोजित कराने में सहयोग करें !
  2. साक्षरता – विशेषकर महिला साक्षरता, शिक्षा – विशेषकर बालिका शिक्षा, स्वास्थ्य – विशेषकर मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, बाल-विकास और पोषण – आंगनवाड़ी कार्यक्रम एवं मिड-डे – मील के माध्यम से बढ़ावा देने में अग्रणी बने ! वार्ड के किसानों को कृषि विभाग की योजनाओं में मिलने वाले सभी लाभों व प्रशिक्षण से जोड़ें ! ध्यान दें कि पंचायतों को 02 अक्टूबर 2010 से हस्तांतरित किए जा चुके 5 विभागों में उक्त सभी कार्यों की निगरानी अब पंचायतों का अहम दायित्व है !
  3. सभी सामाजिक क्षेत्र की संस्थाओं व सेवा प्रदाताओं पर निगरानी व नियंत्रण रखें ! यह सुनिश्चित करें कि पंचायत स्तर पर कार्यरत समस्त विकास कर्मी नियमित रूप से अपनी सेवाएं ग्रामीण समुदाय के लिये, नियमित लक्ष्य के अनुसार दे रहे हैं या नहीं !
  4. ऐसे अन्य कार्य जो समय-समय पर वार्ड सभा एवं वार्ड पंच को सौंपा जावे – संपन्न कराने में सहयोग करें !

ग्राम सभा व उसके कार्य

ग्राम सभा ग्राम स्वराज की मूल इकाई है !

73वें संविधान संशोधन अनुसार ग्राम – सभा को संवैधानिक दर्जा देते हुए इसे कानूनन साल में न्यूनतम दो बार जरूरी बनाया गया है !

प्रत्येक पंचायत क्षेत्र स्तर पर ग्राम – सभा होगी जिसमें पंचायत क्षेत्र के समस्त गांव या गांव के समूह के संबंधित मतदाता सदस्य होंगे, जो ग्राम – सभा में भाग ले सकते हैं !

राजस्थान में वर्ष में ग्राम – सभा की न्यूनतम 4 बैठके करना आवश्यक है ! इसके अलावा ग्राम – सभा के 10% सदस्य लिखित नोटिस देकर, 15 दिन में ग्राम – सभा आयोजित करवा सकते हैं !

ग्राम – सभा की पहली बैठक में पिछले साल का लेखा-जोखा, प्रशासनिक रिपोर्ट, चालू वर्ष के विकास कार्यों की जानकारी, कार्यक्रमों के प्रस्ताव, वार्ड से आने वाले प्रस्तावों पर विचार किया जाना चाहिए ! यह बैठक वित्तीय वर्ष के पहले 3 महीनों में होनी चाहिए, यानी अप्रैल से जून माह के बीच !

ग्राम – सभा की एक बैठक साल के अंतिम 3 माह में होगी, यानी जनवरी से मार्च माह के बीच ! इसमें वर्ष भर के कार्यों का प्रगति विवरण पेश होगा व अगले साल की योजनाओं के प्रस्तावों पर जानकारी तथा ! पास हुए प्रस्तावों की खुली चर्चा समीक्षा व अगले वर्ष के प्रस्तावित कार्यक्रम पेश किए जाएंगे ! पंचायत द्वारा लगाए जाने वाले प्रस्तावित करो (टेक्स) पर भी खुला विचार-विमर्श होगा !

कोरम (गणपूर्ति)

ग्राम सभा में 1 / 10 मतदाताओं की उपस्थिति आवश्यक है ! अनुसूचित जाति, जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, महिलाओं में से भी आबादी के अनुपात में मतदाताओं का भाग लेना जरूरी है ! इसके भी अनुपातिक कोरम पूर्ति बिना ग्रामसभा मान्य नहीं होगी !

पुनः ग्रामसभा होने पर भी उपरोक्त अनुसार कोरम पूरा करना जरूरी है !

अध्यक्षता

सरपंच ग्राम – सभा की अध्यक्षता करेंगे वह उसकी गैर हाजरी में उपसरपंच ग्राम – सभा की अध्यक्षता करेंगे ! उपसरपंच भी गैरहाजिर हो तो ग्राम – सभा द्वारा बहुमत से चुना गया हाजिर व्यक्ति ग्राम – सभा की अध्यक्षता करेंगा !

प्रस्ताव

ग्राम – सभा में किसी भी मुद्दे पर प्रस्ताव ग्राम – सभा की बैठक में उपस्थित और मत देने वाले सदस्यों के बहुमत से ही पारित (पास) हो सकेगा !

ग्राम सभा के मुख्य कार्य

वार्ड सभाओं द्वारा भेजी गई योजनाओं, कार्यक्रमों का अनुमोदन करना; अपेक्षित वार्डो को वरीयता देते हुए योजनाओं, कार्यों को क्रियान्वयन के लिए पंचायत को सौंपना !

गरीबी रेखा से नीचे के लोगों तथा गरीबी उन्मूलन कार्यक्रमों से लाभ लेने योग्य व्यक्तियों की पहचान करना ! गलत अपात्र – चयनित व्यक्तियों का नाम बी पी एल सूची से निरस्त करवाना !

वार्ड – सभा में क्षेत्र में किए गए विकास कार्यों के खर्चों का सही ढंग से उपयोग होने का सामाजिक अंकेशन कराना एवं वार्ड सभा से प्रमाण पत्र प्राप्त करना !

ग्राम पंचायत मे ग्राम सभा का महत्व

कमजोर वर्गों को आवंटित भूखंडों के बारे में सामाजिक ऑडिट करना !

सार्वजनिक विकास कार्यक्रमों के लिए श्रमदान, धनराशि, सामग्री-जन – सहयोग से प्राप्त करना !

किसी भी कार्य योजना के क्रियान्वयन तथा आय एव व्यय के बारे में पंच एवं सरपंचों से स्पष्टीकरण मांगना !

वार्ड सभा द्वारा प्रस्तावित कार्यों, सिफारिशों पर विचार एवं स्वीकृति !

छोटे जल निकायों की योजना व प्रबंधन तथा लघु वन उपजो का प्रबंध !

साक्षरता – विशेषतः महिला साक्षरता, शिक्षा एवं बालिका शिक्षा, स्वास्थ्य विशेषत मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, पोषाहार एवं मिड-डे – मील तथा कृषि विकास एवं प्रशिक्षण के कार्यों को प्रोत्साहित करना !

समुदाय के सभी वर्गों में एकता समरसता (भाईचारा) बढ़ाना !

सामाजिक क्षेत्र की संस्थाओं तथा सरकारी एवं पंचायत के कर्मचारियों पर नियंत्रण तथा कार्यों की निगरानी रखना !

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